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Worship of the Mother Goddess Durga: Significance of Navaratri and the 32 names of the Goddess

Navratri arrives four times in a year, but the sages have made the law of worshiping Navratri mainly twice.

Scroll down to read this article in English

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते।।

Navratri Pooja thali

आज से हिंदू आस्था का पर्व नवरात्र का प्रारंभ हो रहा है। प्रत्येक वर्ष पूरे देश में यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। वर्ष में चार बार नवरात्र का आगमन होता है किन्तु मनीषियों ने मुख्यतः दो बार ही  नवरात्र आराधना का विधान बनाया है। प्रथम है चैत्र नवरात्र तथा द्वितीय है शारदीय नवरात्र। ‘नवरात्र’ शब्द से उन विशेष दिनों का ज्ञान होता है जिसमें शक्ति के नव रूपों की आराधना की जाती है। मनुष्य नवरात्रि के नौ रातों में तीन महादेवीयों मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती के ही नौ रूपों की पूजा करते हैं। ये नौ रूप हैं क्रमशः-

प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्

पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।

शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्री, महागौरी तथा सिद्धिदात्री।

नवरात्रि शक्ति आराधना का पर्व है।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

(जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति के रूप में विद्यमान है उसे नमस्कार है,नमस्कार है बारंबार नमस्कार है)

इन नवरात्रों में देवी के ५१ शक्ति पीठों पर भक्तगणों का समूह बड़े ही उत्साह के साथ पहुंचकर शक्ति उपासना करता है किन्तु जो भक्त नहीं जा पाते वो अपने घरों मे ही मां के प्रतीकस्वरूप कलश की स्थापना करते हैं।

Navratri hindu sacred ritual of havan and yajna
हवन

नवरात्रि में लोग स्वयं का मानसिक एवं आध्यात्मिक संयम बनाए रखने के लिए नौ दिनों तक मां की पूजा, आराधना, यज्ञ, हवन, व्रत इत्यादि करके माँ को प्रसन्न करते हैं। नवरात्रि विशेषकर असत्य पर सत्य की, बुराई पर अच्छाई की, आसुरिक शक्तियों पर दैविक शक्तियों के विजय का प्रतीक है इसीलिए भक्त पूरी श्रद्धा और भक्ति द्वारा माँ दुर्गा का आवाहन करते है और उनसे प्रार्थना करते हुए कहते हैं-

“हे जगद्जननी मां अम्बे ! हमारे अंदर स्थित आसुरिक वृत्तियों का नाश करो। हमें उत्तम गुणों से युक्त करके हमारा आध्यात्मिक मार्ग प्रशस्त करो”।  भक्त नौ दिनों तक पूर्णतया सात्विक जीवन का पालन करते हुए देवी आराधना में लीन रहते हैं।

navratri kanya pooja

नवरात्रि में कन्या पूजन का भी विधान है, लोग छोटी-छोटी कन्याओं को मां का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इन दिनों भक्त दुर्गा सप्तशती का नियमित पाठ व श्रवण करते हैं। किंतु किसी कारणवश  पाठ नहीं हो पाता तो उसके स्थान पर सिद्धकुंजिका स्तोत्र के पाठ का भी विधान है। यह दुर्गा सप्तशती पाठ के ही समान फल प्रदान करने वाला स्तोत्र  है। इसके अतिरिक्त मां दुर्गा के 32 नामों का सच्चे हृदय और शुद्ध मन से 108 बार जाप करने से मनुष्य की सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है ऐसा शास्त्रों में भी विदित है।

 

मां दुर्गा के 32 नाम इस प्रकार हैं-

1. ॐ दुर्गा,

2. दुर्गार्तिशमनी,

3. दुर्गापद्विनिवारिणी,

4. दुर्गमच्छेदनी,

5. दुर्गसाधिनी,

6. दुर्गनाशिनी,

7. दुर्गतोद्धारिणी,

8. दुर्गनिहन्त्री,

9. दुर्गमापहा,

10. दुर्गमज्ञानदा,

11. दुर्गदैत्यलोकदवानला,

12. दुर्गमा,

13. दुर्गमालोका,

14. दुर्गमात्मस्वरुपिणी,

15. दुर्गमार्गप्रदा,

16. दुर्गम विद्या,

17. दुर्गमाश्रिता,

18. दुर्गमज्ञान संस्थाना,

19. दुर्गमध्यान भासिनी,

20. दुर्गमोहा,

21. दुर्गमगा,

22. दुर्गमार्थस्वरुपिणी,

23. दुर्गमासुर संहंत्रि,

24. दुर्गमायुध धारिणी,

25. दुर्गमांगी,

26. दुर्गमता,

27. दुर्गम्या,

28. दुर्गमेश्वरी,

29. दुर्गभीमा,

30. दुर्गभामा,

31. दुर्गमो,

32. दुर्गोद्धारिणी।

मां जगदम्बे सर्वदा अपनी संतानों पर दयादृष्टि बनाए रखें तथा उनकी उन्नति का मार्ग प्रकाशित करें इसी कामना के साथ अपनी लेखनी को विराम देती हूँ।

शारदीय नवरात्रि की हार्दिक शुभकामना



Significance of Navaratra and the thirty-two names of Goddess Durga

sarvamaṃgala māṃgalye śive sarvārthasādhike.

śaraṇye tryaṃbake gauri nārāyaṇi namo'stute.

The Hindu the festival of Navratri is starting from today. Every year this festival is celebrated with great enthusiasm all over the country. Navratri arrives four times in a year, but the sages have made the law of worshiping Navratri mainly twice. The first is Chaitra Navratri and the second is Shardiya Navratri.

pooja thali for aarti prepared for navratri

The word 'Navratra' refers to the special days in which new forms of Shakti are worshipped. On the nine nights of Navratri, human beings worship the nine forms of the three Mahadevi, Maa Durga, Maa Lakshmi and Maa Saraswati. These nine forms are respectively-

Shailputri, Brahmacharini, Chandraghanta, Kushmanda, Skandmata, Katyayani, Kalratri, Mahagauri and Siddhidatri.

(Salutations to the Goddess who is present in the form of Shakti in all beings, Namaskar, Namaskar repeatedly)

Navratri hindu sacred ritual of havan and yajna
हवन

In these Navratras, a group of devotees reach the 51 Shakti Peethas of the Goddess with great enthusiasm and worship Shakti, but the devotees who are unable to go, they establish the Kalash as a symbol of the mother in their own homes. In Navratri, people please the mother by worshipping, praying, yajna, havan, fasting, etc., for nine days to maintain their mental and spiritual restraint.

Navratri especially symbolizes the victory of truth over untruth, good over evil, divine powers over demonic forces, that is why devotees invoke Goddess Durga with full devotion and pray to her says- “O Jagadjanani mother Ambe! Destroy the demonic tendencies within us. Pave our spiritual path by equipping us with good qualities”.

navratri kanya pooja

Devotees remain absorbed in worshipping the Goddess for nine days following a completely sattvik life. There is also a beautiful ritual of worship of young girls during Navratri, people worship small girls as the form of mother and get blessings from them. On these days devotees regularly recite and listen to Durga Saptashati. But if the recitation is not possible for some reason, then there is a law to recite Siddhakunjika Stotra in its place. This is a stotra that gives the same results as the Durga Saptashati text.

durga pooja prashaad of halwa puri

Apart from this, by chanting the 32 names of Maa Durga 108 times with a pure heart and pure mind, all the wishes of a human being are fulfilled, it is also known in the scriptures.

The 32 names of Maa Durga are as follows-

  1. oṃ durgā,
  2.  durgārtiśamanī
  3.  durgāpadvinivāriṇī,
  4.  Durgamacchedanī
  5. durgasādhinī,
  6.  durganāśinī,
  7. durgatoddhāriṇī,
  8. durganihantrī,
  9. durgamāpahā,
  10. durgamajñānadā,
  11. durgadaityalokadavānalā,
  12. durgamā,
  13. durgamālokā,
  14. durgamātmasvarupiṇī,
  15. durgamārgapradā,
  16. durgama vidyā,
  17. durgamāśritā,
  18. durgamajñāna saṃsthānā,
  19. durgamadhyāna bhāsinī,
  20. durgamohā,
  21. durgamagā,
  22. durgamārthasvarupiṇī,
  23. durgamāsura saṃhaṃtri,
  24. durgamāyudha dhāriṇī,
  25. durgamāṃgī,
  26. durgamatā,
  27. durgamyā,
  28.  durgameśvarī,
  29. durgabhīmā,
  30. durgabhāmā,
  31. durgamo,
  32. durgoddhāriṇī.

May Mother Jagdambe always have compassionate eyes on her children and illuminate the path of their progress, with this wish I stop my writing.

Happy sharadiya navratri.

 



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